निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर प्रश्न सं. 32 एवं 33 के उत्तर दीजिए । गांधीवाद में…

2019

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर प्रश्न सं. 32 एवं 33 के उत्तर दीजिए ।

गांधीवाद में राजनीतिक और आध्यात्मिक तत्वों का समन्वय मिलता है । यही इस वाद की विशेषता है । आज संसार में जितने भी वाद प्रचलित हैं वह प्रायः राजनीतिक क्षेत्र में सीमित हो चुके हैं । आत्मा से उनका सम्बंध-विच्छेद होकर केवल बाह्य संसार तक उनका प्रसार रह गया है । मन की निर्मलता और ईश्वर निष्ठा से आत्मा को शुद्ध करना गांधीवाद की प्रथम आवश्यकता है । ऐसा करने से निःस्वार्थ बुद्धि का विकास होता है और मनुष्य सच्चे अर्थों में जन सेवा के लिए तत्पर हो जाता है । गांधीवाद में साम्प्रदायिकता के लिए कोई स्थान नहीं है । इसी समस्या को हल करने के लिए गांधीजी ने अपने जीवन का बलिदान कर दिया था ।

32. उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर बताइये कि संसार के सारे वाद सीमित हैं

Answer: C. राजनीतिक क्षेत्र तकगद्यांश-आधारित प्रश्न में सही विकल्प वही होता है जो गद्यांश में स्पष्ट रूप से कही गई किसी बात को दूसरे शब्दों में दोहराता है — गद्यांश से बाहर की कोई अनुमानित…

  1. A.

    धर्म तक

  2. B.

    साम्प्रदायिकता तक

  3. C.

    राजनीतिक क्षेत्र तक

  4. D.

    आत्मा तक

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Correct answer: C

गद्यांश-आधारित प्रश्न में सही विकल्प वही होता है जो गद्यांश में स्पष्ट रूप से कही गई किसी बात को दूसरे शब्दों में दोहराता है — गद्यांश से बाहर की कोई अनुमानित या जोड़ी गई बात नहीं। कार्य यह है कि प्रश्न का उत्तर देने वाला ठीक वाक्य गद्यांश में खोजा जाए और उसका अर्थ जिस विकल्प से मेल खाता हो, उसे चुना जाए।

गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है — 'आज संसार में जितने भी वाद प्रचलित हैं वह प्रायः राजनीतिक क्षेत्र में सीमित हो चुके हैं।' प्रश्न 32 ठीक यही पूछता है कि संसार के सारे वाद किस सीमा तक सीमित हैं, इसलिए उत्तर गद्यांश में बताई गई इसी सीमा को दोहराएगा।

अगले वाक्य से भी इसकी पुष्टि होती है — गद्यांश आगे कहता है कि इन वादों का आत्मा से सम्बंध-विच्छेद हो चुका है और इनका प्रसार केवल 'बाह्य संसार' तक रह गया है, अर्थात ये राजनीतिक/बाह्य दायरे तक ही रुक जाते हैं और आत्मा तक नहीं पहुँचते — यह गद्यांश में बताई गई सीमा के कथन से पूरी तरह मेल खाता है।

शेष विकल्प गद्यांश के भिन्न-भिन्न वाक्यों से भ्रमित करते हैं:

  • धर्म तक — गद्यांश में मन की निर्मलता और ईश्वर-निष्ठा गांधीवाद की अपनी शर्त के रूप में आती है, संसार के अन्य वादों की सीमा के रूप में नहीं।

  • साम्प्रदायिकता तक — यह कथन गांधीवाद की अपनी विशेषता (कि उसमें साम्प्रदायिकता के लिए स्थान नहीं) के बारे में है, अन्य वादों की सीमा के बारे में नहीं।

  • आत्मा तक — गद्यांश के अनुसार वादों का आत्मा से सम्बंध टूट चुका है, अर्थात वे आत्मा तक पहुँचते ही नहीं; यह कथन को उलटा प्रस्तुत करता है।

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