केवल देखने का आनंद क्या है?

2025

केवल देखने का आनंद क्या है?

Answer: A. कुछ विलक्षण को देखने का कुतूहल मात्रसंकल्पना — गद्यांश-आधारित “X क्या है?” प्रकार के प्रश्न में उत्तर का एकमात्र प्रमाण गद्यांश के भीतर उपस्थित लेखक का अपना परिभाषा-वाक्य होता है; बाहरी जानकारी,…

  1. A.

    कुछ विलक्षण को देखने का कुतूहल मात्र

  2. B.

    श्रोता या पाठक को काव्य का मर्म समझाना

  3. C.

    भावपक्ष को प्रबल बनाना

  4. D.

    सहानुभूति

Attempted by 35 students.

Show answer & explanation

Correct answer: A

संकल्पना — गद्यांश-आधारित “X क्या है?” प्रकार के प्रश्न में उत्तर का एकमात्र प्रमाण गद्यांश के भीतर उपस्थित लेखक का अपना परिभाषा-वाक्य होता है; बाहरी जानकारी, अनुमान या विषय से जुड़ी कोई आकर्षक धारणा प्रमाण नहीं मानी जाती।

विधि यह है — प्रश्न में दिए गए पद को उद्देश्य मानकर गद्यांश में खोजिए, फिर उसी वाक्य का विधेय उठाइए; वही लेखक-प्रदत्त परिभाषा उत्तर होती है।

प्रयोग —

  1. प्रश्न का पद है — “केवल देखने का आनंद”; इसी पद को उद्देश्य के रूप में गद्यांश में खोजा जाता है।

  2. गद्यांश का समापन-वाक्य इसी पद से आरंभ होता है — “केवल देखने का आनंद कुछ विलक्षण को देखने का कुतूहल मात्र होता है।”

  3. इस वाक्य में उद्देश्य “केवल देखने का आनंद” है और उसका विधेय “कुछ विलक्षण को देखने का कुतूहल मात्र” है; अतः यही लेखक द्वारा दी गई परिभाषा है।

प्रति-परीक्षण एवं विकल्प-विवेचन —

  • “श्रोता या पाठक को काव्य का मर्म समझाना” — गद्यांश में इस स्थिति के श्रोता को “तटस्थ तमाशबीन” कहा गया है, अर्थात् वहाँ मर्म समझाने की नहीं, केवल देखने की स्थिति बनी रहती है।

  • “भावपक्ष को प्रबल बनाना” — गद्यांश में भावपक्ष की प्रधानता भारतीय दृष्टि तथा रस-सिद्धांत से जोड़ी गई है, जबकि “केवल देखने का आनंद” पश्चिम की बोधपक्ष-केंद्रित धारणा का परिणाम बताया गया है।

  • “सहानुभूति” — यह भाव-पक्ष की एक वृत्ति है, जबकि लेखक ने “केवल देखने के आनंद” को कुतूहल से परिभाषित किया है, किसी भावात्मक तादात्म्य से नहीं।

अतः उत्तर है — कुछ विलक्षण को देखने का कुतूहल मात्र।

Explore the full course: Ctet Paper 1

Loading lesson…