संधि की दृष्टि से अनुपयुक्त विकल्प चुनिए:
2024
संधि की दृष्टि से अनुपयुक्त विकल्प चुनिए:
Answer: A. दैत्यारि, गत्यनुसार, अग्न्याशय – यण् संधि — अवधारणासंधि दो निकटवर्ती वर्णों के मेल से होने वाला ध्वनि-परिवर्तन है। दीर्घ संधि में सजातीय स्वर मिलकर वही दीर्घ स्वर बनाते हैं; यण् संधि में इ/ई, उ/ऊ और ऋ…
- A.
दैत्यारि, गत्यनुसार, अग्न्याशय – यण् संधि
- B.
मिताहार, विकलांग, भूर्ध्व – दीर्घ संधि
- C.
दिग्विजय, अब्ज, वृहन्नेत्र – व्यंजन संधि
- D.
वयोवृद्ध, पुरोधा, प्रादुर्भूत – विसर्ग संधि
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Correct answer: A
अवधारणा
संधि दो निकटवर्ती वर्णों के मेल से होने वाला ध्वनि-परिवर्तन है। दीर्घ संधि में सजातीय स्वर मिलकर वही दीर्घ स्वर बनाते हैं; यण् संधि में इ/ई, उ/ऊ और ऋ के बाद असमान स्वर आने पर वे क्रमशः य्, व् और र् में बदलते हैं।
व्यंजन संधि में व्यंजनों के मेल से परिवर्तन होता है, जबकि विसर्ग संधि में विसर्ग (ः) अगले वर्ण के अनुसार बदलता है। इसलिए किसी समूह को जाँचने के लिए हर शब्द का संधि-विच्छेद और वास्तविक ध्वनि-परिवर्तन देखना चाहिए।
अनुप्रयोग
दैत्यारि = दैत्य + अरि में अ + अ = आ है, अतः यह दीर्घ संधि है; गति + अनुसार में इ + अ → य् + अ होकर शुद्ध रूप गत्यनुसार बनता है और अग्नि + आशय में इ + आ → य् + आ होकर अग्न्याशय बनता है। “दैत्यारि, गत्यनुसार, अग्न्याशय – यण् संधि” समूह के गत्यनुसार और अग्न्याशय यण् संधि के उदाहरण हैं।
मिताहार = मित + आहार में अ + आ = आ, विकलांग = विकल + अंग में अ + अ = आ और भूर्ध्व = भू + ऊर्ध्व में ऊ + ऊ = ऊ है; तीनों में दीर्घ संधि का नियम लागू होता है।
दिग्विजय = दिक् + विजय, अब्ज = अप् + ज और वृहन्नेत्र = वृहत् + नेत्र में क्रमशः क् → ग्, प् → ब् और त् → न् के व्यंजन-परिवर्तन हैं।
वयोवृद्ध = वयः + वृद्ध, पुरोधा = पुरः + धा और प्रादुर्भूत = प्रादुः + भूत में विसर्ग अगले वर्ण के अनुसार ओ या र् में बदलता है।
पुनः जाँच
“मिताहार, विकलांग, भूर्ध्व – दीर्घ संधि”, “दिग्विजय, अब्ज, वृहन्नेत्र – व्यंजन संधि” और “वयोवृद्ध, पुरोधा, प्रादुर्भूत – विसर्ग संधि” के सभी शब्द अपने लिखे हुए संधि-भेद के नियम से मेल खाते हैं। “दैत्यारि, गत्यनुसार, अग्न्याशय – यण् संधि” में दैत्यारि दीर्घ संधि है, यण् संधि नहीं; इसलिए यही अनुपयुक्त वर्गीकरण है।