निम्नलिखित में कौन-सा कथन अशुद्ध है ?

2019

निम्नलिखित में कौन-सा कथन अशुद्ध है ?

Answer: C. दो महाप्राण व्यंजनों का उच्चारण एक साथ हो सकता है ।हिंदी वर्ण-विचार में व्यंजनों को उच्चारण में लगने वाले श्वास-वायु की मात्रा के आधार पर अल्पप्राण (कम श्वास-वायु — प्रत्येक वर्ग का पहला, तीसरा और पाँचवाँ…

  1. A.

    विसर्ग कंठ्य वर्ण है ।

  2. B.

    हिन्दी में ज्ञ का उच्चारण परम्परा से भिन्न हो गया है ।

  3. C.

    दो महाप्राण व्यंजनों का उच्चारण एक साथ हो सकता है ।

  4. D.

    ‘क्ष’ संयुक्त व्यंजन है ।

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Correct answer: C

हिंदी वर्ण-विचार में व्यंजनों को उच्चारण में लगने वाले श्वास-वायु की मात्रा के आधार पर अल्पप्राण (कम श्वास-वायु — प्रत्येक वर्ग का पहला, तीसरा और पाँचवाँ वर्ण, जैसे क-वर्ग में क, ग, ङ) और महाप्राण (अधिक श्वास-वायु — प्रत्येक वर्ग का दूसरा और चौथा वर्ण, जैसे ख, घ, छ, झ, ठ, ढ, थ, ध, फ, भ) में बाँटा जाता है। हिंदी उच्चारण का एक स्थिर नियम यह है कि दो महाप्राण व्यंजन कभी लगातार (एक साथ) उच्चरित नहीं होते — जब भी ऐसा संयोग बनता दिखाई देता है, पहला महाप्राण अपने सवर्ण अल्पप्राण रूप में बदल जाता है (जैसे 'बुद्धि' में वस्तुतः द् + ध, यानी अल्पप्राण + महाप्राण है, दो महाप्राण नहीं)। साथ ही, विसर्ग (ः) का उच्चारण-स्थान कंठ है इसलिए यह कंठ्य वर्ण है; आधुनिक हिंदी में 'ज्ञ' का उच्चारण 'ग्य' हो चुका है जो परंपरागत संस्कृत उच्चारण (ज् + ञ) से भिन्न है; और 'क्ष' मूलतः क् + ष के मेल से बना संयुक्त व्यंजन है।

प्रत्येक कथन की जाँच:

  1. विसर्ग कंठ्य वर्ण है — सही कथन, क्योंकि विसर्ग का उच्चारण-स्थान कंठ है।

  2. हिंदी में ज्ञ का उच्चारण परंपरा से भिन्न हो गया है — सही कथन, क्योंकि आधुनिक हिंदी में इसे 'ग्य' बोला जाता है, जबकि परंपरागत रूप ज् + ञ था।

  3. दो महाप्राण व्यंजनों का उच्चारण एक साथ हो सकता है — यह कथन नियम के विपरीत है, क्योंकि हिंदी ध्वनि-नियम के अनुसार दो महाप्राण व्यंजन कभी लगातार उच्चरित नहीं हो सकते; अतः यही अशुद्ध कथन है।

  4. 'क्ष' संयुक्त व्यंजन है — सही कथन, क्योंकि यह क् और ष के मेल से बना है।

चूँकि प्रश्न में केवल एक कथन को अशुद्ध बताना है और शेष तीनों कथन मानक हिंदी व्याकरण के सुस्थापित नियमों से पूर्णतः मेल खाते हैं, केवल 'दो महाप्राण व्यंजनों का उच्चारण एक साथ हो सकता है' — यही नियम का उल्लंघन करता है। इसकी पुष्टि 'बुद्धि', 'सिद्धि' जैसे शब्दों से भी होती है, जहाँ प्रतीत होने वाला दोहरा-महाप्राण संयोग वास्तव में अल्पप्राण + महाप्राण में बदल जाता है।

अतः सही उत्तर वह कथन है जो कहता है कि दो महाप्राण व्यंजनों का उच्चारण एक साथ हो सकता है — यही अशुद्ध/गलत कथन है।

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