नीचे दी गई कविता की पंक्तियों को पढ़कर सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। कट गया…
2024
नीचे दी गई कविता की पंक्तियों को पढ़कर सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए।
कट गया है शीश पर
ये शीश है झुका नहीं
राही उसी का नाम है
जो राह में रुका नहीं
एक दिन प्रकाश होता है
कितना भी अंधकार हो
सत्य की विजय सदा
असत्य की हार हो।
सच्चाई साथ में रहे
कैसा भी अपना अंत हो
सत्य की विजय सदा
असत्य की हार हो।
कविता के अनुसार किसी भी स्थिति में :
Answer: C. स्वाभिमान बना रहना चाहिए। — कविता (काव्यांश) पर आधारित प्रश्नों में सही उत्तर कविता के केंद्रीय भाव (मूल संदेश) से निकाला जाता है, न कि किसी एक पंक्ति के शाब्दिक/भौतिक अर्थ से। जब प्रश्न…
- A.
सिर नहीं कटना चाहिए।
- B.
अंधकार नहीं होना चाहिए।
- C.
स्वाभिमान बना रहना चाहिए।
- D.
दुखी नहीं होना चाहिए।
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Correct answer: C
कविता (काव्यांश) पर आधारित प्रश्नों में सही उत्तर कविता के केंद्रीय भाव (मूल संदेश) से निकाला जाता है, न कि किसी एक पंक्ति के शाब्दिक/भौतिक अर्थ से। जब प्रश्न में 'किसी भी स्थिति में' जैसे शब्द आते हैं, तो उत्तर वही भाव होना चाहिए जो कविता में हर परिस्थिति (शारीरिक कष्ट, अंधकार, बुरा अंत) के बावजूद स्थिर रहता है।
कविता में 'कट गया है शीश पर, ये शीश है झुका नहीं' पंक्ति दर्शाती है कि शरीर को चाहे कितनी भी क्षति पहुंचे, आत्म-सम्मान (सिर का न झुकना) कायम रहता है। आगे की पंक्तियां 'सत्य की विजय सदा, असत्य की हार हो' और 'सच्चाई साथ में रहे, कैसा भी अपना अंत हो' भी इसी भाव को दोहराती हैं — चाहे परिणाम कुछ भी हो, सत्य और आत्म-सम्मान का मार्ग नहीं छोड़ा जाता। अतः कविता के अनुसार, किसी भी स्थिति में स्वाभिमान बना रहना चाहिए।
विकल्पों की तुलना:
सिर नहीं कटना चाहिए — कविता सिर कटने से बचने की बात नहीं करती, बल्कि सिर कटने पर भी न झुकने (आत्म-सम्मान) की बात करती है; रूपक को शाब्दिक अर्थ में लेना भूल है।
अंधकार नहीं होना चाहिए — कविता अंधकार को स्वीकारती है ('कितना भी अंधकार हो') और कहती है कि उसके बावजूद सत्य की विजय होती है; अंधकार के अभाव की कोई शर्त नहीं लगाई गई है।
दुखी नहीं होना चाहिए — कविता भावनात्मक स्थिति (दुख-सुख) पर केंद्रित नहीं, बल्कि सत्य व आत्म-सम्मान बनाए रखने पर केंद्रित है, भले ही अंत दुखद हो ('कैसा भी अपना अंत हो')।
स्वाभिमान बना रहना चाहिए — पंक्ति 'ये शीश है झुका नहीं' प्रत्यक्ष रूप से आत्म-सम्मान बनाए रखने का भाव दर्शाती है, जो कविता की हर पंक्ति में दोहराए गए सत्य-निष्ठा के भाव से मेल खाता है।