निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले…

2023

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।

जीवन में कभी अभाव का दुख, कभी स्वभाव का और कभी दुर्भाव का और इससे भी ऊपर सदैव तनाव का दुख घेरे रहता है । इन्हीं दुखों के वशीभूत हम टकराव की ज़िंदगी जीते हुए बिखराव का दुख भोगते हैं । दुखों से सभी डरते हैं, क्योंकि दुख अप्रिय हैं । दुखों से दूर रहने और सुख पाने की चाह में हम नए-नए पापों में प्रवेश करने लगते हैं । यही हमारी सबसे बड़ी भूल होती है । पाप का फल सुख रोकता है । सुख चाहिए तो पापों से मुक्त होने की चाह जागृत करनी होगी । दुखों से छुटकारा और सुख प्राप्ति का एकमात्र मार्ग है धर्म को आत्मसात करना । जहाँ धर्म है, वहाँ पाप नहीं है और जब पाप नहीं तो वहाँ दुख नहीं । जहाँ दुख नहीं वहाँ सुख को अनंत होने का पूरा अवसर प्राप्त होता है । दुख हमारी भूल और हमारे मानवीय स्तर से गिरकर घिनौने कर्मों का फल है ।

गद्यांश के मूल विषय में शामिल नहीं है :

Answer: A. दंडअपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों में गद्यांश का 'मूल विषय' उन्हीं शब्दों/भावों से बनता है जिनकी चर्चा गद्यांश में स्पष्ट रूप से और बार-बार की गई हो। जिस शब्द…

  1. A.

    दंड

  2. B.

    सुख

  3. C.

    दुख

  4. D.

    धर्म

Attempted by 7 students.

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Correct answer: A

अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों में गद्यांश का 'मूल विषय' उन्हीं शब्दों/भावों से बनता है जिनकी चर्चा गद्यांश में स्पष्ट रूप से और बार-बार की गई हो। जिस शब्द या अवधारणा का गद्यांश में कहीं भी उल्लेख नहीं मिलता, वह मूल विषय का भाग नहीं माना जाता, भले ही वह विषय-वस्तु से जुड़ा प्रतीत हो।

प्रस्तुत गद्यांश दुख, सुख, पाप और धर्म के पारस्परिक संबंध पर केंद्रित है — गद्यांश दुख के विभिन्न रूपों (अभाव, स्वभाव, दुर्भाव, तनाव, टकराव, बिखराव) से आरंभ होता है, फिर सुख पाने की चाह में किए गए पापों की बात करता है, और अंत में धर्म को दुख-मुक्ति व सुख-प्राप्ति का एकमात्र मार्ग बताता है। गद्यांश में कहीं भी 'दंड' शब्द या दंड की अवधारणा (अर्थात किसी बाह्य सत्ता द्वारा दी गई सजा) का उल्लेख नहीं है — यहाँ पाप का परिणाम 'दुख' बताया गया है, न कि 'दंड'।

  • सुख — गद्यांश में बार-बार वर्णित है ('सुख चाहिए तो पापों से मुक्त होने की चाह जागृत करनी होगी', 'सुख को अनंत होने का पूरा अवसर') → मूल विषय में शामिल।

  • दुख — गद्यांश आरंभ से अंत तक केंद्रीय विषय है ('जीवन में...दुख', 'दुखों से सभी डरते हैं') → मूल विषय में शामिल।

  • धर्म — दुख-मुक्ति और सुख-प्राप्ति के एकमात्र मार्ग के रूप में वर्णित है ('एकमात्र मार्ग है धर्म को आत्मसात करना') → मूल विषय में शामिल।

  • दंड — गद्यांश में इस शब्द या भाव का कहीं उल्लेख नहीं है; पाप का परिणाम 'दुख' बताया गया है, 'दंड' नहीं → मूल विषय से बाहर।

अतः गद्यांश के मूल विषय में शामिल न होने वाला विकल्प 'दंड' है।

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