बच्चों का संज्ञानात्मक विकास और भाषा :
2024
बच्चों का संज्ञानात्मक विकास और भाषा :
Answer: D. उस संस्कृति और समुदायों से घनिष्ठ रूप से संबंधित हैं जिनमें बच्चे रहते हैं। — बाल विकास और शिक्षा-मनोविज्ञान में भाषा-अर्जन तथा संज्ञानात्मक विकास के परस्पर संबंध की व्याख्या करने के लिए कई सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं — व्यवहारवादी…
- A.
उद्दीपक प्रतिक्रिया संबंध के सिद्धांत और अनुकरण की प्रक्रिया से संबंधित हैं।
- B.
मनुष्य का सहजजात उपकरण हैं जिसके द्वारा वह भाषा में निपुणता प्राप्त करता है।
- C.
विकास में कोई संबंध नहीं है।
- D.
उस संस्कृति और समुदायों से घनिष्ठ रूप से संबंधित हैं जिनमें बच्चे रहते हैं।
Attempted by 14 students.
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Correct answer: D
बाल विकास और शिक्षा-मनोविज्ञान में भाषा-अर्जन तथा संज्ञानात्मक विकास के परस्पर संबंध की व्याख्या करने के लिए कई सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं — व्यवहारवादी दृष्टिकोण (स्किनर) भाषा को उद्दीपक-प्रतिक्रिया और अनुकरण से जोड़ता है, सहजजातवादी दृष्टिकोण (चोम्स्की) इसे एक जन्मजात भाषा-अर्जन युक्ति से जोड़ता है, जबकि वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत भाषा और संज्ञान दोनों के विकास को उस सामाजिक अंतःक्रिया और सांस्कृतिक संदर्भ से अनिवार्य रूप से जुड़ा मानता है जिसमें बालक की परवरिश होती है — अर्थात भाषा केवल संचार का साधन नहीं बल्कि सोच-विचार के लिए एक सांस्कृतिक औजार है।
प्रश्न में 'बच्चों का संज्ञानात्मक विकास और भाषा' के बीच के संबंध को पूर्ण करना है। वाइगोत्स्की के सिद्धांत के अनुसार यह संबंध बालक जिस संस्कृति और समुदाय में रहता है, उससे घनिष्ठ रूप से जुड़ा होता है — बालक सामाजिक अंतःक्रिया, भाषिक विनिमय और सांस्कृतिक औजारों (जैसे संकेत-चिह्न व भाषा) के माध्यम से अपनी संज्ञानात्मक और भाषिक क्षमताओं का विकास करता है। अतः यही कथन प्रश्न के कथन को सर्वाधिक उपयुक्त रूप से पूर्ण करता है।
उद्दीपक-प्रतिक्रिया और अनुकरण की प्रक्रिया वाला कथन व्यवहारवादी परिप्रेक्ष्य को दर्शाता है, जिसमें भाषा-सीख को बाह्य प्रबलन और नकल तक सीमित माना जाता है, संस्कृति या समुदाय की भूमिका को नहीं।
सहजजात उपकरण वाला कथन चोम्स्की के सहजजातवाद को दर्शाता है, जिसमें भाषा-अर्जन को एक जैविक-आंतरिक क्षमता के रूप में समझाया जाता है, बाह्य सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ के रूप में नहीं।
'कोई संबंध नहीं' वाला कथन संज्ञान और भाषा के बीच किसी भी अंतःक्रिया को नकारता है, जबकि विकासात्मक मनोविज्ञान की लगभग सभी प्रमुख धाराएँ — व्यवहारवाद, सहजजातवाद और सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत — दोनों के बीच किसी न किसी रूप में संबंध स्वीकार करती हैं।
इस प्रकार, वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत पर आधारित कथन — जो संज्ञानात्मक विकास और भाषा को संस्कृति व समुदाय से जोड़ता है — इस प्रश्न का सर्वाधिक समुचित तथा CTET (जनवरी 2024, पेपर-1) की आधिकारिक उत्तर-कुंजी द्वारा पुष्ट उत्तर है।