निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही /सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का…
2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही /सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
प्रश्न उठता है कि प्राण का शरीर के साथ बेहतर तालमेल कैसे बैठाकर रखा जाए। ऐसा क्या करें कि प्राण शरीर के हर अंग की तरफ संतुलित और व्यवस्थित होकर बहे। देखा जाए तो बीमारी और कुछ भी नहीं, बल्कि प्राण का उस अंग विशेष में असंतुलित हो जाना ही है। स्वास्थ्य का अर्थ ही होता है – प्राण का समुचित तरीके से समस्त अंगों की तरफ बहना। योग में इस प्राण को बल देने के लिए अनेक अभ्यास हैं। इनके जरिए हम अपने प्राण को रोज बल दे सकते हैं और शरीर में होने वाली बीमारियों की रोकथाम कर सकते हैं। यह प्राण केवल हमारे शरीर की ही संभाल नहीं करता, यह मन, बुद्धि आदि प्रत्येक आयाम को जीवन देता रहता है।
जीवन के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है :
Answer: D. प्राण और शरीर का सामंजस्य। — अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों में सही विकल्प वह होता है जो पाठ में वर्णित केंद्रीय विचार को सटीक रूप से दर्शाए — पाठ में उल्लिखित किसी एक सहायक उपाय को,…
- A.
योग के माध्यम से प्राणायाम करना।
- B.
प्राण के माध्यम से योग करना।
- C.
प्राण और शरीर का दीर्घायु होना।
- D.
प्राण और शरीर का सामंजस्य।
Attempted by 40 students.
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Correct answer: D
अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों में सही विकल्प वह होता है जो पाठ में वर्णित केंद्रीय विचार को सटीक रूप से दर्शाए — पाठ में उल्लिखित किसी एक सहायक उपाय को, विपरीत क्रम में रखे गए संबंध को, या पाठ में स्वतंत्र रूप से न कहे गए तथ्य को नहीं।
दिए गए गद्यांश में बीमारी को प्राण के किसी अंग विशेष में असंतुलित हो जाने के रूप में और स्वास्थ्य को प्राण के समस्त अंगों की तरफ समुचित रूप से बहने के रूप में परिभाषित किया गया है। पाठ के अंत में यह भी बताया गया है कि यह प्राण केवल हमारे शरीर की ही संभाल नहीं करता, बल्कि मन, बुद्धि आदि प्रत्येक आयाम को भी जीवन देता रहता है। इस प्रकार गद्यांश का केंद्रीय विचार यह है कि प्राण और शरीर के बीच उचित तालमेल यानी सामंजस्य बना रहना ही जीवन के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, जो विकल्प 'प्राण और शरीर का सामंजस्य' से सटीक रूप से मेल खाता है।
'योग के माध्यम से प्राणायाम करना' गद्यांश में उल्लिखित प्राण को बल देने के अभ्यासों की श्रेणी में गिना जा सकता है, जबकि पाठ स्वयं किसी अभ्यास विशेष का नाम नहीं लेता; यह गद्यांश का केंद्रीय विचार नहीं है।
'प्राण के माध्यम से योग करना' पाठ में बताए गए संबंध को उलट देता है; गद्यांश के अनुसार योग के अभ्यासों से प्राण को बल मिलता है, न कि प्राण से योग होता है।
'प्राण और शरीर का दीर्घायु होना' गद्यांश में कहीं नहीं कहा गया है; पाठ दीर्घायु की नहीं, प्राण के संतुलित प्रवाह अर्थात स्वास्थ्य की बात करता है।
अतः पाठ के समग्र संदेश के आधार पर सही उत्तर 'प्राण और शरीर का सामंजस्य' है।