निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर प्रश्न के उत्तर दीजिए : चंचल पग दीपशिखा के…
2022
निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर प्रश्न के उत्तर दीजिए :
चंचल पग दीपशिखा के घर गृह, मग, वन में आया वसंत। सुलगा फाल्गुन का सूनापन शिखाओं में अनंत सौरभ शीतल की ज्वाला से फैला उर-उर में मधुर दाह आया बसन्त, भर पृथ्वी पर स्वर्गिक सुन्दरता का प्रवाह कलि के पलकों में मिलन स्वप्न अलि के अंतर में प्रणय गान लेकर आया, प्रेमी वसंत आकुल जड़-चेतन स्नेह प्राण!
प्रश्न- धरती पर स्वर्ग जैसा सौन्दर्य कब होता है ?
Answer: B. वसंत में — अवधारणा: अपठित गद्यांश/पद्यांश पर आधारित प्रश्नों में उत्तर सदैव प्रस्तुत पाठ्यांश में दिए गए स्पष्ट संकेत-शब्दों और कथनों से ही निकाला जाता है, बाहरी सामान्य…
- A.
फाल्गुन में
- B.
वसंत में
- C.
चैत्र में
- D.
होली आने पर
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Correct answer: B
अवधारणा: अपठित गद्यांश/पद्यांश पर आधारित प्रश्नों में उत्तर सदैव प्रस्तुत पाठ्यांश में दिए गए स्पष्ट संकेत-शब्दों और कथनों से ही निकाला जाता है, बाहरी सामान्य ज्ञान से नहीं — पाठ्यांश जिस भी शब्द या घटना से वर्णित परिणाम को सीधे जोड़ता है, वही सही उत्तर होता है।
प्रयोग: दिए गए पद्यांश में स्पष्ट पंक्ति है — "आया बसन्त, भर पृथ्वी पर स्वर्गिक सुन्दरता का प्रवाह" — अर्थात् एक विशेष ऋतु के आगमन के साथ ही पृथ्वी पर स्वर्ग जैसी सुंदरता का प्रवाह होना बताया गया है। पद्यांश में यह ऋतु स्पष्ट रूप से "वसंत" के नाम से बार-बार आई है ("आया वसंत", "आया बसन्त", "प्रेमी वसंत"), इसलिए प्रश्न का उत्तर सीधे इसी पंक्ति और नाम से निकलता है।
तुलना (विकल्पवार जाँच):
फाल्गुन में: पद्यांश में फाल्गुन का उल्लेख केवल इस रूप में है कि उसका "सूनापन" सुलग उठा — यह एक पृष्ठभूमि की स्थिति है, न कि वह घटना जिसे पंक्ति "भर पृथ्वी पर स्वर्गिक सुन्दरता का प्रवाह" सीधे कारण के रूप में बताती है।
चैत्र में: चैत्र शब्द पद्यांश की किसी भी पंक्ति में प्रयुक्त नहीं हुआ है; यह विकल्प पाठ्यांश से बाहर का है।
होली आने पर: होली शब्द भी पद्यांश में कहीं नहीं आया है; पद्यांश सौन्दर्य के प्रवाह का कारण किसी त्यौहार को नहीं, बल्कि सीधे उस ऋतु के आगमन को बताता है जिसका नाम पंक्तियों में बार-बार लिखा है।
परिणाम: अतः पद्यांश के अनुसार धरती पर स्वर्ग जैसा सौन्दर्य "वसंत में" ही होता है।