निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : आकाश का साफ़ा…

2019

निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

आकाश का साफ़ा बाँधकर
सूरज की चिलम खींचता
बैठा है पहाड़
घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी
पास ही दहक रही है
पलाश के जंगल की अंगीठी
अंधकार दूर पूर्व में
सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्ले-सा
अचानक बोला मोर
जैसे किसी ने आवाज़ दी -
‘अजी सुनते हो।’
चिलम औंधी
धुआँ उठा
सूरज डूबा
अँधेरा छा गया।

पलाश वन को अंगीठी कहा गया है क्योंकि

Answer: D. खिले पलाश के वन आग के समान दिखते हैं।काव्य में रूपक एक ऐसी अलंकार-युक्ति है जिसमें एक वस्तु को सीधे दूसरी वस्तु के रूप में वर्णित किया जाता है, क्योंकि दोनों में कोई साझा गुण या दृश्य समानता होती…

  1. A.

    पलाश ग्रीष्म ऋतु में फूलता है।

  2. B.

    जंगल में आग लगी होती है।

  3. C.

    पलाश की लकड़ी जलाने के काम आती है।

  4. D.

    खिले पलाश के वन आग के समान दिखते हैं।

Attempted by 9 students.

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Correct answer: D

काव्य में रूपक एक ऐसी अलंकार-युक्ति है जिसमें एक वस्तु को सीधे दूसरी वस्तु के रूप में वर्णित किया जाता है, क्योंकि दोनों में कोई साझा गुण या दृश्य समानता होती है — 'जैसे' या 'सा' जैसे तुलनावाचक शब्दों के बिना। रूपक के पीछे का कारण जानने के लिए दोनों वस्तुओं में साझा विशेषता खोजनी होती है।

प्रस्तुत काव्यांश में कवि पलाश के जंगल को 'अंगीठी' कहकर 'दहक रही है' बताता है। पलाश के फूल ग्रीष्म ऋतु में खिलते हैं और उनका रंग गहरा लाल-नारंगी होता है। जब पूरा जंगल इन फूलों से भर जाता है, तो दूर से देखने पर उसका रंग और चमक धधकती हुई अंगीठी या आग जैसी प्रतीत होती है। यही दृश्य समानता इस रूपक का आधार है।

निकटतम विकल्पों से तुलना:

  • पलाश ग्रीष्म ऋतु में फूलता है — यह पलाश के पुष्पन-काल के बारे में एक सही तथ्य है, परंतु यह अकेले यह नहीं बताता कि जंगल को अंगीठी क्यों कहा गया; इसमें रंग-समानता का उल्लेख नहीं है।

  • जंगल में आग लगी होती है — यह एक वास्तविक (शाब्दिक) आग की घटना का वर्णन करता है, जबकि काव्यांश में वर्णन आलंकारिक/रूपकात्मक है, वास्तविक अग्निकांड का नहीं।

  • पलाश की लकड़ी जलाने के काम आती है — यह पलाश की लकड़ी की ईंधन के रूप में व्यावहारिक उपयोगिता की बात करता है, जिसका काव्यांश में वर्णित दृश्य बिंब से कोई सीधा संबंध नहीं है।

अतः पलाश वन को अंगीठी की उपमा इसलिए दी गई है क्योंकि खिले हुए पलाश के फूलों का लाल-नारंगी रंग दूर से आग जैसा प्रतीत होता है — यही अर्थ 'खिले पलाश के वन आग के समान दिखते हैं' कथन में निहित है।

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