Comprehension: दिए गए गद्यांश के आधार पर निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर दीजिए--…
2025
Comprehension:
दिए गए गद्यांश के आधार पर निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर दीजिए--
आलवार एवं नयनार भक्तों में वर्ण-व्यवस्था का विरोध और सामाजिक समानता की भावना बहुत साफ है। शूद्रों के साथ-साथ महिला भक्त भी वहाँ पहली बार दिखाई देती हैं। आण्डाल नामक महिला की गिनती प्रसिद्ध आलवार भक्तों में की जाती है। आठवीं शताब्दी के अंत में शंकराचार्य ने वर्ण व्यवस्था को फिर से मज़बूत करने का आधार प्रदान किया। इनकी मान्यता आलवार एवं नयनार भक्तों की सामाजिक समानता की भावना के विपरीत थी।
शंकराचार्य की मान्यताओं का विरोध रामानुजाचार्य एवं मध्वाचार्य ने किया। रामानुजाचार्य ने भक्ति के क्षेत्र में सबकी समानता को स्वीकार किया। इसके बावजूद वे जाति-पाँति के बंधनों को सामाजिक व्यवहार के क्षेत्र में चुनौती नहीं दे सके। इन्हीं की शिष्य-परंपरा में रामानंद हुए। उन्होंने भक्ति तथा धर्म के क्षेत्र में ब्राह्मणों के एकाधिकार और जाति प्रथा से उत्पन्न छुआ-छूत की भावना का ज़ोरदार विरोध किया। मध्वाचार्य ने अपने शिष्यों को जाति और सम्प्रदाय भेद पर आधारित कुरीतियों को दूर करने का प्रयास करने का निर्देश दिया। वल्लभाचार्य के पुष्टिमार्ग में जातीय भेदभाव नहीं था। मुसलमान भक्त कवि रसखान विट्ठलनाथ के प्रिय शिष्य थे। इन सभी ने कर्मकांड, बाह्याचार, ब्राह्मण-पुरोहित वर्चस्व तथा जाति एवं वर्ण-व्यवस्था का विरोध किया।
रामानंद निम्न में से किसकी शिष्य-परंपरा में थे--
Answer: B. रामानुजाचार्य — अवधारणा: अपठित गद्यांश आधारित प्रश्नों में उत्तर केवल गद्यांश में स्पष्ट रूप से कही गई बात से लिया जाता है — प्रश्न में पूछे गए संबंध (यहाँ ‘किसकी…
- A.
वल्लभाचार्य
- B.
रामानुजाचार्य
- C.
विट्ठलनाथ
- D.
मध्वाचार्य
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Correct answer: B
अवधारणा: अपठित गद्यांश आधारित प्रश्नों में उत्तर केवल गद्यांश में स्पष्ट रूप से कही गई बात से लिया जाता है — प्रश्न में पूछे गए संबंध (यहाँ ‘किसकी शिष्य-परंपरा’) के लिए गद्यांश की उसी पंक्ति को खोजना होता है जो सीधे उस संबंध को बताती है, बाहरी सामान्य ज्ञान को गद्यांश के कथन से ऊपर नहीं रखा जाता।
प्रयोग: गद्यांश की पंक्ति है — ‘रामानुजाचार्य ने भक्ति के क्षेत्र में सबकी समानता को स्वीकार किया... इन्हीं की शिष्य-परंपरा में रामानंद हुए।’ यहाँ ‘इन्हीं की’ शब्द ठीक पहले उल्लिखित व्यक्ति अर्थात् रामानुजाचार्य की ओर संकेत करता है, इसलिए यह पंक्ति सीधे बताती है कि रामानंद रामानुजाचार्य की शिष्य-परंपरा में हुए।
वल्लभाचार्य — गद्यांश में इनके पुष्टिमार्ग का उल्लेख है, जिसमें जातीय भेदभाव नहीं था; रामानंद से इनका शिष्य-संबंध गद्यांश में नहीं बताया गया।
विट्ठलनाथ — गद्यांश में इन्हें मुसलमान भक्त कवि रसखान के गुरु के रूप में बताया गया है, रामानंद के गुरु के रूप में नहीं।
मध्वाचार्य — गद्यांश में इनके अपने शिष्यों को जाति-सम्प्रदाय भेद की कुरीतियाँ दूर करने का निर्देश देने का उल्लेख है, रामानंद से सीधा शिष्य-संबंध नहीं बताया गया।
परिणाम: अतः गद्यांश के अनुसार रामानंद रामानुजाचार्य की शिष्य-परंपरा में हुए।