गद्यांश के आधार पर प्रश्न का उत्तर दें। छठी सदी के उत्तरार्द्ध से लेकर दसवीं…
2025
गद्यांश के आधार पर प्रश्न का उत्तर दें।
छठी सदी के उत्तरार्द्ध से लेकर दसवीं सदी तक दक्षिण भारत में अनेक संतों ने भक्ति आंदोलन का विस्तार किया। इन संतों की भक्ति विशुद्ध प्रेम पर आधारित थी। इनके उपास्य देव शिव और विष्णु थे। ये संत नयनार (जो शिव के भक्त थे) और आलवार (जो विष्णु के भक्त थे) के नाम से प्रसिद्ध हुए। नयनार और आलवार संतों ने जैनियों और बौद्धों के अपरिग्रह को अस्वीकार कर ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत भक्ति को ही मुक्ति का मार्ग बताया। इन संतों में ब्राह्मण के साथ-साथ निम्न जातियों के भी कई संत थे। उनमें अंदाल नामक एक महिला संत भी थीं। नयनारों और आलवारों के आक्रमण का प्रमुख लक्ष्य बौद्ध धर्म और जैन धर्म थे। आम जनता को अपने साथ लाने में नयनार एवं आलवार संतों को सफलता मिली। इन संतों ने स्थानीय मिथकों एवं गाथाओं का सहारा लिया। उनकी भाषा आम लोगों की भाषा (तमिल एवं तेलुगू) थी। लोगों का विश्वास और स्थानीय शासकों के समर्थन से यह आंदोलन पूरे दक्षिण भारत में फैल गया।
नयनार एवं आलवार संतों की काव्य भाषा थी---
Answer: D. तमिल एवं तेलुगू — अवधारणा: अपठित गद्यांश-आधारित प्रश्न में उत्तर हमेशा गद्यांश में स्पष्ट रूप से लिखे गए कथन से ही तय होता है — बाहरी सामान्य ज्ञान या मान्यताओं से नहीं, बल्कि…
- A.
तमिल एवं संस्कृत
- B.
तेलुगू एवं मलयालम
- C.
तमिल एवं कन्नड़
- D.
तमिल एवं तेलुगू
Attempted by 44 students.
Show answer & explanation
Correct answer: D
अवधारणा: अपठित गद्यांश-आधारित प्रश्न में उत्तर हमेशा गद्यांश में स्पष्ट रूप से लिखे गए कथन से ही तय होता है — बाहरी सामान्य ज्ञान या मान्यताओं से नहीं, बल्कि गद्यांश की उस ठीक पंक्ति से जहाँ पूछा गया तथ्य वर्णित है।
अनुप्रयोग: प्रश्न पूछता है कि नयनार एवं आलवार संतों की काव्य भाषा क्या थी। गद्यांश में स्पष्ट रूप से लिखा है — "उनकी भाषा आम लोगों की भाषा (तमिल एवं तेलुगू) थी।" अर्थात गद्यांश स्वयं इन संतों की काव्य-भाषा के रूप में तमिल और तेलुगू का उल्लेख करता है।
तुलना/विरोधाभास — शेष विकल्पों की गद्यांश से जाँच:
तमिल एवं संस्कृत: गद्यांश में संस्कृत भाषा का कहीं भी उल्लेख नहीं है, इसलिए यह युग्म गद्यांश की पंक्ति से मेल नहीं खाता।
तेलुगू एवं मलयालम: गद्यांश में मलयालम भाषा का कोई उल्लेख नहीं मिलता, इसलिए यह युग्म भी गद्यांश-कथन से मेल नहीं खाता।
तमिल एवं कन्नड़: गद्यांश में कन्नड़ भाषा का कहीं उल्लेख नहीं है, अतः यह युग्म भी गद्यांश की पंक्ति से मेल नहीं खाता।
परिणाम: गद्यांश में स्पष्ट रूप से उल्लिखित भाषा-युग्म "तमिल एवं तेलुगू" ही गद्यांश के कथन से सीधे मेल खाता है।