निर्देश : दिए गए अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही…
2018
निर्देश : दिए गए अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिए।
"प्रारम्भ से ही प्रकृति और मनुष्य का अटूट संबंध रहा है। प्रकृति और मनुष्य का संबंध अन्योन्याश्रित और परस्पर सह-अस्तित्व पर निर्भर है। प्रकृति ने मानव के लिए जीवनदायक तत्वों को उत्पन्न किया। मनुष्य ने वृक्षों के फल, बीज, जड़ें आदि खाकर अपनी भूख मिटाई। पेड़-पौधे हमें केवल भोजन ही प्रदान नहीं करते अपितु जीवनदायिनी वायु, ऑक्सीजन भी प्रदान करते हैं। ये वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करते हैं और ऑक्सीजन बाहर निकालते हैं। पृथ्वी पर हरियाली के स्रोत पेड़-पौधे ही हैं। वर्षा के कारक यही पेड़-पौधे ही हैं। मनुष्य ने अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वन-संपदा का अंधाधुंध दोहन किया है जिसके कारण प्राकृतिक असंतुलन उत्पन्न हो गया है। पर्यावरण में ऑक्सीजन की कमी और कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ोतरी तथा पर्यावरण प्रदूषण के कारण अनेक प्रकार की घातक बीमारियाँ फैल रही हैं। पेड़-पौधों की कमी के चलते अनावृष्टि, सूखा और भूमि-क्षरण की समस्या पैदा हो गई है।"
पर्यावरण असंतुलन का दुष्परिणाम क्या नहीं है?
Answer: D. छायादार वृक्षों में फल नहीं लग पाना — अवधारणा: अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों में जब यह पूछा जाए कि किसी बात का उल्लेख अनुच्छेद में नहीं किया गया है, तो सही विकल्प वही माना जाता है जिसका तथ्य…
- A.
पर्यावरण प्रदूषण के चलते घातक बीमारियों का बढ़ना
- B.
पेड़-पौधों की कमी के कारण बाढ़, अनावृष्टि, सूखा और भूमि-क्षरण की समस्याएँ पैदा होना
- C.
ऑक्सीजन की कमी के कारण कार्बन डाइऑक्साइड में बढ़ोतरी
- D.
छायादार वृक्षों में फल नहीं लग पाना
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Correct answer: D
अवधारणा: अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों में जब यह पूछा जाए कि किसी बात का उल्लेख अनुच्छेद में नहीं किया गया है, तो सही विकल्प वही माना जाता है जिसका तथ्य अनुच्छेद में कहीं भी वर्णित नहीं है; शेष सभी विकल्पों की पुष्टि अनुच्छेद की किसी न किसी पंक्ति से प्रत्यक्ष रूप से होनी चाहिए।
अनुप्रयोग: दिए गए अनुच्छेद में पर्यावरण असंतुलन (वन-संपदा के अंधाधुंध दोहन) के निम्नलिखित दुष्परिणाम स्पष्ट रूप से बताए गए हैं:
पर्यावरण में ऑक्सीजन की कमी, कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ोतरी और पर्यावरण प्रदूषण के कारण घातक बीमारियों का फैलना।
पेड़-पौधों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करने और ऑक्सीजन छोड़ने की क्रिया बाधित होने से ऑक्सीजन की कमी के साथ-साथ कार्बन डाइऑक्साइड में बढ़ोतरी होना।
पेड़-पौधों की कमी के चलते अनावृष्टि, सूखा और भूमि-क्षरण जैसी समस्याओं का उत्पन्न होना।
तुलना: इनमें से अनावृष्टि, सूखा और भूमि-क्षरण से जुड़ा विकल्प इसी उल्लेखित परिणाम-समूह के भीतर आता है (भले ही उसमें बाढ़ जैसा एक अतिरिक्त, विषय-अनुरूप बिंदु भी जोड़ा गया हो), जबकि छायादार वृक्षों में फल लगने या न लगने का विषय अनुच्छेद की किसी भी पंक्ति से जुड़ा ही नहीं है — यह वृक्षों की फलदायी क्षमता से संबंधित एक सर्वथा भिन्न प्रसंग है। अतः यही कथन पर्यावरण असंतुलन का दुष्परिणाम नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद में इसका कोई आधार नहीं मिलता।