निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का…
2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इस संसार में सब कुछ अस्थायी है। पाप और पुण्य दोनों इस संसार से संबंधित हैं, इसलिए पाप और पुण्य भी अस्थायी हैं। पुण्य सुख देकर और पाप दुख देकर अंत को प्राप्त होता है। लेकिन पाप और पुण्य में थोड़ा अंतर यह है कि पुण्य का फल यदि हम नहीं चाहते तो उस फल को अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र हैं। पाप लोहे की जंजीर है तो पुण्य सोने की। बंधन दोनों में है। लोहे की जंजीर से छूटने का आदमी का मन भी करता है लेकिन सोने की जंजीर से जो बंधा हुआ हो उसको वह बंधन प्यारा लगने लगता है। उसमें उसको धन नजर आता है उससे छूटने का मन नहीं करता।
इस संसार में कुछ भी ________ नहीं है।
Answer: C. स्थायी — अवधारणा: गद्यांश-आधारित रिक्त-स्थान प्रश्न में उत्तर शब्द वही चुना जाता है जो गद्यांश के मूल/केंद्रीय कथन के तर्क को अक्षुण्ण रखे — प्रायः वह उसका पर्यायवाची…
- A.
अपूर्ण
- B.
पूर्ण
- C.
स्थायी
- D.
अस्थायी
Attempted by 8 students.
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Correct answer: C
अवधारणा: गद्यांश-आधारित रिक्त-स्थान प्रश्न में उत्तर शब्द वही चुना जाता है जो गद्यांश के मूल/केंद्रीय कथन के तर्क को अक्षुण्ण रखे — प्रायः वह उसका पर्यायवाची होता है, और जब वाक्य निषेधात्मक (नकारात्मक) रूप में हो तो उसका विपरीतार्थक शब्द वही समग्र भाव व्यक्त करता है।
प्रयोग: गद्यांश की पहली पंक्ति में स्पष्ट कथन है — 'इस संसार में सब कुछ अस्थायी है'। प्रश्न-वाक्य निषेधात्मक है — 'इस संसार में कुछ भी ________ नहीं है'। चूंकि इसमें पहले से 'कुछ भी... नहीं' है, इसलिए रिक्त स्थान में वह शब्द आएगा जिसका निषेध करने पर वही भाव बने जो 'सब कुछ अस्थायी है' कहता है। 'सब कुछ अस्थायी है' का ही दूसरा रूप है 'कुछ भी स्थायी नहीं है' — दोनों कथन एक ही बात कहते हैं।
क्रॉस-चेक: यदि रिक्त स्थान में 'अस्थायी' रखा जाए तो वाक्य बनेगा 'कुछ भी अस्थायी नहीं है', जो गद्यांश के आरंभिक कथन 'सब कुछ अस्थायी है' के ठीक विपरीत अर्थ देता है — यह गद्यांश से असंगत है। इसलिए यह विकल्प तर्क-संगत नहीं बैठता।
निष्कर्ष: अतः सही उत्तर 'स्थायी' है, क्योंकि यही शब्द गद्यांश के मूल कथन के तर्क से पूर्णतः मेल खाता है।