राष्ट्रीयता के विकास के लिए भाषा एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। भाषा ही एक ऐसा…

2023

राष्ट्रीयता के विकास के लिए भाषा एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। भाषा ही एक ऐसा साधन है, जिसके द्वारा मनुष्य और मानव-समुदाय अपने भावों को एक-दूसरे के सामने प्रकट करते हैं। जिस प्रकार पहाड़, नदी तथा समुद्र मनुष्य के आपस में मिलने-जुलने में रुकावट पैदा करते हैं, वैसे ही भाषा की भिन्नता मनुष्यों में पारस्परिक संबंध स्थापित करने में बाधक होती है। मनुष्य के विभिन्न समुदायों के अपने-अपने आदर्श, विचार और अपनी-अपनी भावनाएँ होती हैं जिनकी अभिव्यक्ति भाषा द्वारा होती है। संगीत और साहित्य की अभिव्यक्ति का साधन भी भाषा ही है। भाषा एक ऐसा साधन है, जिससे मनुष्य एक-दूसरे के समीप आ जाते हैं, उनमें घनिष्ठता स्थापित हो जाती है। यही कारण है कि एक भाषा बोलने वाले लोग परस्पर सहानुभूति रखते हैं। राष्ट्रीयता की भावना के लिए भाषा तत्त्व परम आवश्यक है।

उपर्युक्त गद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक क्या होगा?

Answer: B. भाषा का महत्त्वअवधारणाउपयुक्त शीर्षक गद्यांश के प्रमुख विषय और केंद्रीय प्रतिपाद्य को व्यक्त करता है, न कि केवल किसी एक उदाहरण या गौण प्रयोजन को। उसे पूरी चर्चा को समेटना…

  1. A.

    राष्ट्रीयता और मनुष्य

  2. B.

    भाषा का महत्त्व

  3. C.

    अभिव्यक्ति का साधन

  4. D.

    उपर्युक्त में से एक से अधिक

  5. E.

    उपर्युक्त में से कोई नहीं

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Correct answer: B

अवधारणा

उपयुक्त शीर्षक गद्यांश के प्रमुख विषय और केंद्रीय प्रतिपाद्य को व्यक्त करता है, न कि केवल किसी एक उदाहरण या गौण प्रयोजन को। उसे पूरी चर्चा को समेटना चाहिए, परंतु इतना व्यापक या संकीर्ण नहीं होना चाहिए कि उसका आशय विकृत हो जाए।

अनुप्रयोग

गद्यांश में भाषा को राष्ट्रीय भावना, संचार, अभिव्यक्ति, साहित्य, संगीत, निकटता और पारस्परिक सहानुभूति के लिए बार-बार अनिवार्य बताया गया है। इन सभी बिंदुओं का एक ही केंद्रीय विचार है: भाषा का समग्र महत्त्व।

तुलना

  • ‘राष्ट्रीयता और मनुष्य’ व्यापक है और पूरे गद्यांश में चर्चित केंद्रीय माध्यम के रूप में भाषा का उल्लेख नहीं करता।

  • ‘भाषा का महत्त्व’ बार-बार प्रतिपादित विचार को समेटता है और गद्यांश में वर्णित भाषा की विभिन्न भूमिकाओं को समायोजित करता है।

  • ‘अभिव्यक्ति का साधन’ भाषा की एक भूमिका को दर्शाता है, परंतु पूरी चर्चा की अपेक्षा अधिक संकीर्ण है।

  • ‘उपर्युक्त में से एक से अधिक’ तभी उपयुक्त होता, जब कम-से-कम दो शीर्षक गद्यांश के केंद्रीय प्रतिपाद्य को समान रूप से समेटते; यहाँ एक शीर्षक समग्र विषय को, जबकि अन्य केवल आंशिक या अधिक व्यापक विषय को दर्शाते हैं।

  • ‘उपर्युक्त में से कोई नहीं’ लागू नहीं होता, क्योंकि दिए गए शीर्षकों में से एक केंद्रीय विषय को सीधे समेटता है।

अतः सबसे उपयुक्त शीर्षक ‘भाषा का महत्त्व’ है।

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