निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प…
2024
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
दिवसावसान का समय,
मेघमय आसमान से उतर रही है
वह संध्या सुंदरी परी-सी
धीरे-धीरे-धीरे।
तिमिरांचल में चंचलता का नहीं कहीं आभास,
मधुर मधुर हैं दोनों उसके अधर-
किंतु जरा गंभीर नहीं है उनमें हास-विलास
हँसता है तो केवल तारा एक
गुँथा हुआ उन घुँघराले काले-काले बालों से
हृदयराज की रानी का वह करता है अभिषेक।
‘हृदयराज की रानी’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
Answer: C. संध्या — हिंदी काव्य में मानवीकरण (personification) की शैली में किसी निर्जीव या प्राकृतिक तत्व — जैसे संध्या, रात्रि, नदी — को मानव जैसा रूप, अंग और भाव देकर चित्रित…
- A.
मेघ
- B.
आकाश
- C.
संध्या
- D.
तिमिर
Attempted by 6 students.
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Correct answer: C
हिंदी काव्य में मानवीकरण (personification) की शैली में किसी निर्जीव या प्राकृतिक तत्व — जैसे संध्या, रात्रि, नदी — को मानव जैसा रूप, अंग और भाव देकर चित्रित किया जाता है। ऐसी कविता में उसके बाद आने वाले सर्वनाम (‘उसके’, ‘उसका’) और वर्णनात्मक वाक्यांश तब तक उसी पूर्व-परिचित मानवीकृत पात्र की ओर संकेत करते रहते हैं, जब तक पद्यांश में कोई नया पात्र स्पष्ट रूप से सामने न लाया जाए।
दिए गए पद्यांश की तीसरी पंक्ति में ही ‘वह संध्या सुंदरी परी-सी’ कहकर संध्या को परी-सी सुंदरी के रूप में मानवीकृत किया गया है। इसके आगे ‘उसके अधर’ और ‘उन घुँघराले काले-काले बालों’ जैसे वाक्यांश इसी संध्या-रूपी पात्र के अंगों का वर्णन करते हुए चलते हैं। अंतिम पंक्ति में उन्हीं बालों में गुँथा तारा ‘हृदयराज की रानी’ का अभिषेक करता है — यह भी उसी निरंतर वर्णन-शृंखला का भाग है, इसलिए ‘हृदयराज की रानी’ पदवी संध्या के लिए ही प्रयुक्त हुई है।
अन्य विकल्पों की तुलना:
मेघ — पद्यांश की पहली पंक्तियों में केवल वह पृष्ठभूमि है जिससे संध्या धीरे-धीरे उतरती है; आगे उसे अधर या बाल जैसी कोई मानवीय विशेषता नहीं दी गई।
आकाश — केवल आरंभिक दृश्य-सन्दर्भ (मेघमय आसमान) के रूप में आता है; इसका आगे कोई मानवीकृत वर्णन नहीं होता।
तिमिर (तिमिरांचल) — केवल परिवेश में चंचलता के अभाव को बताने वाला एक विशेषण-वाक्यांश है; इसे भी अधर या बाल जैसी कोई विशेषता नहीं दी गई।