निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही / सबसे उपयुक्त…
2023
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही / सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
दिन भर हमारा प्राण गहरे से बहना चाहिए । यदि पेट के नीचे कंद स्थान से प्राण का बहना सुनिश्चित कर लिया जाए तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है । लेकिन अधिकतर हमारा प्राण छाती से शुरू करके छोटी सी यात्रा करके रह जाता है । उसका गहरे से बहना नहीं हो पाता । यदि हम दिन में जब भी याद आए, तभी अपने प्राण को धीमा और गहरा भरना शुरू कर दें तो ख़ुद को ऊर्जावान, प्राणवान, शक्तिवान और शांत स्वभाव का अनुभव करने लगेंगे । हमारे भीतर धैर्य और रचनात्मकता बढ़ने लगेगी । मन का तनाव समाप्त हो जाएगा । भय, घबराहट से मुक्ति मिल जाएगी । साथ ही यह अभ्यास ध्यान की गहराइयों में ले जाने में भी सहायक होगा ।
मानव-जीवन में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है :
Answer: C. प्राण वायु — अवधारणा: अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों में जब यह पूछा जाए कि गद्यांश में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विषय क्या है, तो उत्तर वही विचार होता है जिसके इर्द-गिर्द…
- A.
योग
- B.
ध्यान
- C.
प्राण वायु
- D.
अभ्यास
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Correct answer: C
अवधारणा: अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों में जब यह पूछा जाए कि गद्यांश में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विषय क्या है, तो उत्तर वही विचार होता है जिसके इर्द-गिर्द पूरा गद्यांश बुना गया हो और जिसकी चर्चा आरंभ से अंत तक बार-बार, विस्तार से हुई हो — न कि कोई ऐसा शब्द जो गद्यांश में केवल एक बार, किसी सहायक या अनुषंगी संदर्भ में आया हो।
प्रयोग: दिए गए गद्यांश में आरंभ से अंत तक प्राण के गहरे प्रवाह की बात कही गई है — पेट के नीचे कंद-स्थान से प्राण का प्रवाह सुनिश्चित करना, दिन भर धीमी और गहरी साँस भरने का अभ्यास करना, तथा इससे मिलने वाले लाभ (स्वास्थ्य, ऊर्जा, शक्ति, शांत स्वभाव, धैर्य, रचनात्मकता, तनाव-मुक्ति, निर्भयता) — ये सभी प्राण वायु के इर्द-गिर्द ही केंद्रित हैं। इसलिए गद्यांश का केंद्रीय और सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विषय प्राण वायु है।
तुलना:
योग: गद्यांश में इसका कहीं भी उल्लेख नहीं है।
ध्यान: गद्यांश में केवल एक बार आता है, वह भी किसी अन्य गतिविधि के परिणामस्वरूप उल्लेखित; गद्यांश में इसकी कोई निरंतर या विस्तृत चर्चा नहीं है, अतः यह गद्यांश का विषय नहीं।
अभ्यास: यह शब्द गद्यांश में उस दैनिक क्रिया के लिए प्रयुक्त हुआ है जिसे दोहराने की बात कही गई है; यह मात्र एक विधि है, स्वयं गद्यांश का केंद्रीय विषय नहीं।
अतः सही उत्तर 'प्राण वायु' है।