निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का…

2024

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

इच्छा से प्रेरित होकर लोग उन्नति के मार्ग पर चलने लगते हैं। अपनी यात्रा के आरंभ में वे अपनी प्रगति में बाधा डालने वाली सैकड़ों व्यक्तिगत और सामाजिक खामियों का पता लगाते हैं। उन आदिमानवों ने सुख प्राप्त करने की अपनी सहज इच्छा से प्रेरित होकर भी इन खामियों के खिलाफ संघर्ष किया। हालाँकि प्रगति प्राप्त करने के लिए कोई व्यवस्थित तरीका उपलब्ध न होने के कारण वे बहुत कमजोर थे।

मानव अस्तित्व त्रिपक्षीय है - भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक। अपनी यात्रा के प्रारंभिक चरण में सुदूर अतीत के अंधेरे युग में मानव ने अकेले भौतिक और मानसिक क्षेत्रों में प्रगति की। मानव संरचना में रूपात्मक परिवर्तन अब भी हो रहे हैं और भविष्य में भी होंगे। मनुष्य भविष्य में ऐसे उल्लेखनीय परिवर्तनों से गुजरेगा जो आज के लोगों के लिए लगभग अपरिचित होंगे। हम यह नहीं कह सकते कि उन आरंभिक मनुष्यों ने वास्तव में कोई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रगति की थी। हालाँकि उन्होंने जो भी उन्नति की, वह किसी भी तरह से महत्वहीन नहीं थी।

उन्नति प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि मनुष्य :

Answer: B. अपनी कमियों को जान ले।अवधारणा: अपठित गद्यांश प्रश्नों में सही विकल्प वही होता है जो गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहे गए तथ्य से सीधे पुष्ट हो — किसी बाहरी धारणा या अनुमान से नहीं।…

  1. A.

    अपनी खूबियों को जान ले।

  2. B.

    अपनी कमियों को जान ले।

  3. C.

    अपने लक्ष्य की ओर चलता रहे।

  4. D.

    संघर्षरत रहे और विद्रोह करे।

Attempted by 7 students.

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Correct answer: B

अवधारणा: अपठित गद्यांश प्रश्नों में सही विकल्प वही होता है जो गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहे गए तथ्य से सीधे पुष्ट हो — किसी बाहरी धारणा या अनुमान से नहीं।

अनुप्रयोग: गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यात्रा के आरंभ में मनुष्य अपनी प्रगति में बाधा डालने वाली सैकड़ों व्यक्तिगत और सामाजिक खामियों का पता लगाते हैं। अर्थात् उन्नति की राह पर चलने वाला व्यक्ति सबसे पहले उन कमियों को पहचानता है जो उसकी प्रगति में बाधक हैं। यही तथ्य प्रश्न में पूछी गई "उन्नति के लिए आवश्यक शर्त" का सीधा उत्तर देता है।

तुलना: अपनी खूबियों को जान लेना गद्यांश की दिशा के विपरीत है; गद्यांश बाधक तत्वों की पहचान पर बल देता है, गुणों की गणना पर नहीं। केवल लक्ष्य की ओर चलते रहना अधूरा है; गद्यांश के अनुसार उचित पद्धति के अभाव में केवल गति बनाए रखने वाले आरंभिक मनुष्य कमजोर ही बने रहे। "संघर्ष" शब्द गद्यांश में बाधाओं के विरुद्ध किए गए प्रयास के लिए प्रयुक्त है, सत्ता या व्यवस्था के विरुद्ध विद्रोह के अर्थ में नहीं।

परिणाम: अतः गद्यांश के अनुसार उन्नति प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि मनुष्य अपनी कमियों को जान ले।

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